भूल कर भी न मारे बच्चों को मारने से सुधरने के बदले कैसे और बिगड़ जाते है

बच्चे को कैसे मार कर उनको सुधरने के बदले और बिगाड़ देते है जिससे उस बच्चे का मानसिक विकास पर कुप्रभाव पड़ता है जिससे उसका भविष्य भी खराब हो सकता है |

बच्चे तो सच्चे होते ही है पर अधिकतर बच्चे चंचल भी होते है जिससे वो बहुत सारी गलतिया भी करते रहेते है पर इसके लिए बहुत सारे लोगो बच्चो को मारते है पर चलिये जानते है बच्चे को मारने से पड़ने वाले कुप्रभाव को

क्रोध का ज्वालामुखी

छोटे बच्चों पर उठाया गया हाथ उनके शरीर से ज़्यादा मन और मस्तिष्क को घायल करता है। इस प्रकार घायल बचपन अपने मन में हर व्यक्ति और रिश्ते के प्रति केवल क्रोध की भी भावना रखता है। बड़ा होने पर यह क्रोध का ज्वालामुखी कभी-कभी घातक हिंसा में भी बदल जाता है। अधिकतर हिंसक अपराधी बचपन में पड़ी मार को ही अपने जीवन का पहला सीखा हुआ पाठ बताते हैं।

मार फिर मार को ही जन्म देती है

जब आप अपने बच्चे को अनुशासित करने के लिए मार का सहारा लेते हैं तब आप उन्हें यह सीखा रहे हैं कि अनुशासन लाने के लिए मारना ही जरूरी होता है। ऐसे में बच्चे खुद बड़े होकर यही पाठ अपने बच्चों को भी सिखाने की कोशिश करते हैं।

मैं हमेशा गलत हूँ

जिन बच्चों को बचपन में हर बात पर मार पड़ती है वो बचपन से ही अपना आत्मविश्वास खो देते हैं। यह बच्चे मैं गलत हूँ की भावना के साथ बड़े होते हैं और इसीलिए परिवार और समाज से कट जाते हैं। हमेशा मन में अपराधी होने की भावना, हकलाना, अंतर्मुखी व्यवहार, जरूरत से ज्यादा गुस्सा करना आदि इन बच्चों में अधिकतर देखा जाता है।

बड़ों के प्रति दुर्भाव

जो बच्चे घर हो या स्कूल, किसी न किसी बात पर जब मार खाते हैं तब वे अपने बड़ों को अपना प्रतिद्वंद्वी मान बैठते हैं। ऐसे में माता-पिता हों या शिक्षक वे उनकी कही हर बात को ज़बरदस्ती थोपा गया फरमान मानते हैं जिसका पालन न करना उनकी ज़िद बन जाती है। ऐसे में ये बच्चे अपने मन में बड़ों  के प्रति आदर की भावना लाने में असफल रहते हैं।

क्रोध का ज्वालामुखी:

छोटे बच्चों पर उठाया गया हाथ उनके शरीर से ज़्यादा मन और मस्तिष्क को घायल करता है। इस प्रकार घायल बचपन अपने मन में हर व्यक्ति और रिश्ते के प्रति केवल क्रोध की भी भावना रखता है। बड़ा होने पर यह क्रोध का ज्वालामुखी कभी-कभी घातक हिंसा में भी बदल जाता है। अधिकतर हिंसक अपराधी बचपन में पड़ी मार को ही अपने जीवन का पहला सीखा हुआ पाठ बताते हैं।

अनुशासन का गलत तरीका

जो बच्चे घर और स्कूल में अधिक मार का सामना करते हैं वो बड़े होकर यही मानते हैं कि अनुशासन के लिए केवल मारना ही एक सबसे अच्छा तरीका हो सकता है। ये बच्चे मार के आगे भूत भागता है वाली कहावत को अपना मूल मंत्र मानते हुए जिंदगी में हर समय अपनाने में गर्व महसूस करते हैं।

देखा जाये तो बच्चों के मन और तन दोनों ही कोमल होते हैं। ऐसे में उनपर उठा हुआ एक हाथ उनके तन से ज्यादा कोमल मन पर चोट करता है। इसलिए कोमल मस्तिष्क को मार से नहीं बल्कि प्यार से मजबूत करना चाहिए।

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